रास्तों की बात थी, न मंजिलों की बात थी,
कदम क्या कहते मेरे? और, हौसलों की बात थी।
शहर क्या? वीराना क्या? था अपना क्या? बेगाना क्या?
मेरी निगह ने जो किये, उन फैसलों की बात थी।
नजरों ने देखा उसे और दिल का मेहमां कर लिया,
वो जवां हुआ दर्द सा, या किस्मतों की बात थी।
मैं नहीं भूला उन्हें, उन्होंने कभी याद नहीं किया
नहीं मेरी दीवानगी, मिजाज ए उल्फतों की बात थी
अब तो खवाबों में भी बस, नाम सा उनका सुनते हैं,
वक्त के जो तय किये, उन फासलों की बात थी
डॉ. हीरा इंदौरी की मार्च 2006 में प्रकाशित एक बन्दिश
औरत
अश्क बरसाए तो सावन की झड़ी है औरत ।
मुस्कराए तो सितारों की लड़ी है औरत ।।
लुत्फ आता है वहां ये जहां हिलमिल के रहें ।
आदमी है जो पकोड़ा तो कढ़ी है औरत ।।
आदमी जब इसे पाता है तो बन जाता है मर्द।
कोई टानिक कोई बूटी जड़ी है औरत ।।
सिर्फ औरत की ही हर बात चले जिस घर में ।
उसमें हर आदमी छोटा है बड़ी है औरत ।।
गैर की हो तो नहीं रूपमती से कुछ कम ।
और अपनी हो तो लगता है सड़ी है औरत ।।
सुबह होते ही वो बच्चों पे बरस पडती है ।
अपने घर में तो अलारम घड़ी है औरत ।।
चाहे झांसी का किला हो के हो वो चिकमंगलूर ।
कोई मैदान हो मर्दो से लड़ी है औरत ।।
लोग इसे चांद से सूरज से हसीं कहते है ।
बावजूद इसके अंधेरे में पड़ी है औरत ।।
इसमें कुछ शक नही सब कहते है 'हीरा' मुझको ।
पर मेरे दिल की अंगूठी में जड़ी है औरत ।।
6 टिप्पणियां:
bahut hi badhiyaa vishleshan
इसमें कुछ शक नही सब कहते है 'हीरा' मुझको ।
पर मेरे दिल की अंगूठी में जड़ी है औरत ।।
nice
अब तो खवाबों में भी बस, नाम सा उनका सुनते हैं,
वक्त के जो तय किये, उन फासलों की बात थी
बहुत सुन्दर, लाजबाब गजले, आश्चर्य कि किसी पाठक ने कोई टिपण्णी नहीं दी इस बारे में !
blog bahut der se khulta hai aapka....honslo ki baat wali behad achhi lagi.......
वाह...वाह......राजे जी दो गजलें एक साथ.....और दोनों कमाल की .....
रास्तों की बात थी, न मंजिलों की बात थी,
कदम क्या कहते मेरे? और, हौसलों की बात थी।
वाह..........!!
नहीं भूला उन्हें, उन्होंने कभी याद नहीं किया
नहीं मेरी दीवानगी, मिजाज ए उल्फतों की बात थी
बहुत खूब.....!!
अश्क बरसाए तो सावन की झड़ी है औरत ।
मुस्कराए तो सितारों की लड़ी है औरत ।।
बहुत सुंदर......!!
लोग इसे चांद से सूरज से हसीं कहते है ।
बावजूद इसके अंधेरे में पड़ी है औरत ।।
ये to lajwaab kar gya ....!!
यह बन्दिश हमे पसन्द आई ।
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