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सोमवार, 31 मार्च 2014

दिल की धोखा खाने की आदत


जिधर रोका वहीं जाने की आदत
दिल की धोखा खाने की आदत

उम्र ने कहा दानां बनो ना
हमें नादान कहाने की आदत

बिना वजह रूठ जाते हैं वो
जाने है मेरी मनाने की आदत

अजनबी ले लेतें है मुझसे वादा,
शक्ल पर चिपकी, निभाने की आदत

सबको पता,  कब.. होंगे कहां
जिंदा घर, मुर्दा श्मशान जाने की आदत

तुम तो कभी... आवाज दोगे नहीं
हमें ही सुनने-सुनाने की आदत

तेरी हकीकतों से रूबरू तो हुए हैं
... जाएगी जाते जाते ख्वाब सजाने की आदत

सारी दुनियां खाक होनी ही है
...  हमें जलने, उन्हें जलाने की आदत

पता नहीं रूह का, फिर होता होगा क्या?
जिस्म की कभी भी, मर जाने की आदत

शनिवार, 11 जून 2011

किसी को उसका गिरेबां मत दिखाओ।


क्‍या होना चाहि‍ये, कहां, मत बताओ,
किसी को उसका गिरेबां मत दिखाओ।


उलझे रहने दो लफ्जों-ख्यालों-ख्वाबों में,
हकीकतों में आई मुसीबतें मत जताओ।


किसको फुर्सत है कि समझे जिन्दगी,
जैसा है, चलने दो, सवाल मत उठाओ।


मौत औरों को आती है, अभी जीने दो
मौत की बातें कर, यूं ही मत डराओ

बिजी रहने दो टुच्ची गमी-खुशी में
रूह के सन्नाटे क्या हैं, मत सुझाओ।
 -----------c-------------c-------------c-------------



  1. मैने अपने मनोचिकित्सक से कहा कि पता नहीं क्‍यों सब मुझसे नफरत करते हैं तो वो बोला - मैं उन लोगों से तो नहीं मिला पर तुम वाकई बहुत बेहूदा आदमी हो।
  2. स्त्री होने के कई फायदे हैं वो रो सकती है, सुन्दर कपड़े पहन सकती है और किसी जगह डूब रही हो तो उसे ही लोग पहले बचाते हैं।
  3. स्त्री शब्द के दोनों अर्थ एक समान है वो गर्म होती है, दबाती है और सलवटें निकाल कर अपने हिसाब से सल डाल देती है।
  4. अगर प्यार अंधा होता है तो अंतःवस्त्र इतने प्रसिद्ध, प्रचलन और मांग में क्यों रहते हैं।
  5. अगर आप बहुत आरामतलब हो गये हैं तो निश्चित ही आपको जंग भी लग गया होगा।
  6. उस व्यक्ति की जिन्दगी भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण है जिसका जीवन बहुत ही सामान्य बीता।
  7. यदि आप आत्मविश्वास से भरे दिख रहे हैं तो कोई भी आपका फायदा उठा सकता है क्योंकि आपको खुद को ही पता नहीं होता कि आप क्या कर रहे हैं।
  8. उन सब चीजों में से जिन्हें मैने खोया, मैं अपने दिमाग की कमी सबसे ज्यादा महसूस करता हूं।- मार्क ट्वेन
  9. बुरी याददाश्त, खुशियों की चाबी है, क्योंकि आप एक ही चुटकुले पर कई बार हंस सकते हैं।
  10. कुछ लोग कहीं जाने पर खुश होते हैं और कुछ लोगों के कहीं भी जाने पर सब खुश होते हैं।
  11. दृढ़ता और हठ में ये अन्तर है कि दृढ़ता मजबूत इरादे से आती है और हठ सिरे से किसी चीज को नकारने से।
  12. पोषक आहार का पहला नियम है जो स्वादिष्ट है वो आपके लिए अच्छी चीज नहीं है।
  13. महत्वपूर्ण बात यह है कि महत्वपूर्ण चीज को कैसे महत्वपूर्ण रखा जाये - जर्मन कहावत
  14. अतीत उस नाव की तरह है जिससे हम वर्तमान की नदी पार करें ना कि अतीत की नाव को सिर पर उठाकर नदी पार करें - राजेशा
  15. आदमी के साथ खुश रहना है तो जरूरी है कि उसे आप समझें और थोड़ा बहुत प्यार दें पर अगर औरत के साथ खुश रहना है तो जरूरी है कि आप उसे ढेर सारा प्यार दें और भूल के भी उसे समझने की कोशिश ना करें।
  16. मैंने खेलना नहीं छोड़ा क्योंकि मैं उम्रदराज हो रहा हूं, मैं उम्रदराज हो रहा हूं क्योंकि मैंने खेलना छोड़ दिया है।
  17. अगर सब एक जैसा ही सोच रहे हैं तो मानिये कोई भी सोचने के मामले में गंभीर और अच्छी तरह नहीं सोच रहा है।
  18. आप एक ही बार जवान होते हैं पर हो सकता है आप हमेशा अपरिपक्व रहें।

गुरुवार, 10 मार्च 2011

मुजरिम बनोगे?


नहीं देते, मत दो दिखाई, मुजरिम बनोगे?
बेवजह न दो सफाई, मुजरिम बनोगे?

देखो-सुनो-कहो, सच की तारीफ करो
सच के लिए न करो लड़ाई, मुजरिम बनोगे?

दिलासे दो, दिलासे लो, मुर्दे विदा करो
न सोचो, कब, किसकी आई, मुजरिम बनोगे?

कर गुलामी, इच्छाएं पालो, झूठे अहं पालो
सिर कफन बांधा, होगी हंसाई, मुजरिम बनोगे?

दुनियां है नक्कारखाना अपनी ही रौ में
तुमने जो, अपनी तूती बजाई, मुजरिम बनोगे

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

किस्मत में, अनपढ़ फकीरों की, खुदा मिलना


एक अंधा सा कुआं, हर रौशनी से डर
क्यों डराता है, किसी सोचे से, जुदा मिलना

रात भर को सब्र की, रोशन शमा रखिये
जो चाहते हो, नूर की परचम, सुबह मिलना

अपने खयालों-फैसलों की, यही आदत सताती है
तय था कल, अब फिर कोई, शक-ओ-शुबा मिलना

तेरी ही कोशिश पर, नजर उसकी, जो करता तय
कुछ और कर, ये जानकर कि, तयशुदा मिलना

जो जायेगी ही एक दिन, दौलत वो छोड़िये
जन्नते दिखलायेगा, गरीबों की दुआ मिलना

किताबी कीड़ों को, रद्दी के सिवा क्या मिलना
किस्मत में अनपढ़ फकीरों की खुदा मिलना

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

जमाने की हकीकतें ना आयें रास क्या करें



जमाने की हकीकतें ना आयें रास क्या करें
अजीज भी पराया सा, अब किससे आस, क्या कहें

जब मिला-जो भी मिला, मतलब का ही रोगी मिला
ये किस्सा था हर रिश्ते का, बस और खास क्या कहें

जिससे बड़ी उम्मीदें थीं, वो भी मिला पर शर्तों पर
अब नाउम्मीदी कैसी है?, क्यों दिल उदास क्या कहें?

सेहत तो भली दिखती है, सूरत पे भी मुस्कुराहटें
पर दिल के हैं अहसास क्या, होश-ओ-हवास क्या कहें,

यही हर घड़ी सवाल था, हो जिन्दगी का हश्र क्या?
इक मौत "अजनबी" तय लगी, बाकी कयास क्या कहें

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

तुझमें मुझमें बैर कराये, वो धर्म नहीं है, साजिश है


हर तरह की हैवानियत से टकराना जरूरत है
इंसानियत के लिए हर मजहब, भूल जाना जरूरत है


कब तक हम हिन्दू या मुसलमान रहेंगे
देश की तरक्की के लिए, ये सब छुट जाना जरूरत है

पैगम्बर गये, वो ऋषि गये जिन्होंने एक को जाना
अब हमारा भी किसी दोगलेपन से, हट जाना जरूरत है


कब तक तुम कल की दुहाई दे, अपना आज बिगाड़ोगे
अतीत की काली परछाईंयो से, कट जाना जरूरत है

इन पंडितों और मौलवियों की साजिशें समझों
ये बनें रहें, इनकी ”हमारा बंट जाना“ जरूरत है


तुझमें मुझमें बैर कराये, वो धर्म नहीं है, साजिश है
ऐसे किसी भी नर्क की राह से, पलट जाना जरूरत है

”ना तो जिओ ना जीने दो“, कौन सी किताब कहती है
दिमागों से ऐसी सारी किताबें, छंट जाना जरूरत है

रविवार, 6 फ़रवरी 2011

क्या फैसला करते?


सांसों की ही फिक्र की और बिक गई सब जिन्दगी
सांसे थीं या थी बला, क्या फैसला करते?
उलझे-क्या करें, ना करें? हमेशा अंजामों से डरे,
मौत तक बस यही चला, क्या फैसला करते?

शराफतें पाले सीने में, बस घिरे रहे कमीनों में
आस्तीनों में विष पला, क्या फैसला करते?
दूसरों को क्यों दोष दें, गर हिम्मत ना अपना होश दे
अपनी ही हसरतों ने छला, क्या फैसला करते?

डर बसा रोम-रोम में, ध्यान हर घड़ी था विलोम में
धड़कनें थीं कि जलजला, क्या फैसला करते?
हर बार धोखा, हर बार गम, हर बार इक संगदिल सनम
अपने दिल बस ना चला, क्या फैसला करते?

शनिवार, 15 जनवरी 2011

खुद को ही समझाने वाले, कुछ-कुछ पागल होते हैं


पा गये हैं जो मंजिले वो, किसी को क्योंकर याद करें
राहों में खो जाने वाले, कुछ-कुछ पागल होते हैं

मजनुओं की कुत्तों से यारी, रांझों को खंजर का प्यार
इश्क से वफा निभाने वाले, कुछ-कुछ पागल होते हैं

वो मजबूर था, वो गाफिल था दुनियां की खुदगर्जी से,
खुद को ये समझाने वाले, कुछ-कुछ पागल होते हैं

शहर में सजी ख्वाहिशें सारी, पर दश्त से जिनकी यारी
वीरानों में गाने वाले, कुछ-कुछ पागल होते हैं

जिन्दगी से वो ऐसे गये, किस देस-ठिकाने खबर नहीं
"अजनबी" यादें सजाने वाले, कुछ कुछ पागल होते हैं

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बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

मैंने सच की बात की तो लोग दुश्मन हो गये


मैंने सच की बात की तो लोग दुश्मन हो गये
बात हक के साथ की तो लोग दुश्मन हो गये

उम्र भर जिनसे निभाई मैंने दुश्मनी बार बार
मौत की मंजिल पे सारे मेरे हमदम हो गये

कभी कभी जिनसे मिला, सबने ही प्यारा कहा
साथ जिनके बरसों से, वो लोग बेमन हो गये

खून के रिश्तों की लज्जत, जाने कब कहां खो गई
अजनबी लोगों से रिश्ते, दिल की उलझन हो गये

रूह की बातें पराई, मन से अनबन हो गई
खरीद लो और बेच दो, अब लोग बस तन हो गये

सोमवार, 23 अगस्त 2010

देखेंगे मौत के बाद फरिश्ते, क्या तारे होकर ढूंढते हैं


रात चले उग आते हैं मेरी आंखों में तेरी यादों के चांद
फिर सहर तलक, सारे जुगनू, बंजारे होकर ढूंढते हैं

जिसने भी देखा जलवा तेरा, हुआ बलवा उसके खयालों में
फिर सारी उम्र तक एक सफर, बेचारे होकर ढूंढते हैं

अंजाम पे पहुंची कहानी है, ये दिल तेरे गम की निशानी है
देखेंगे मौत के बाद फरिश्ते, क्या तारे होकर ढूंढते हैं

इन आग के शोलों पर ना जा, कि रूसवाई से क्यों है रजा
इस काले धुंए में छिपा है क्या, अंगारे होकर ढूंढते हैं

सोमवार, 16 अगस्त 2010

वो शख्स बात-बात पे बिगड़ता हुआ दिखा


वो शख्स बात-बात पे बिगड़ता हुआ दिखा
ख्वाबों में भी नाराज हो चिढ़ता हुआ दिखा

मैं दिल की बात मानकर, परेशान ही रहा
नींदों में भी खुद से ही लड़ता हुआ दिखा

जब रिश्ते बोझ बन गये, तो वक्त को लगा
अपना ही साया, अपने से बिछड़ता हुआ दिखा

समझाया लाख दिल को, मगर मानता नहीं
हर छोटी-मोटी बात पर अड़ता हुआ दिखा

उनसे मिली नजर तो, हम बयान क्या करें
कुछ धारदार सीने में गढ़ता हुआ दिखा

शनिवार, 7 अगस्त 2010

वक्त जाने क्या दिखलाता है?


बर्बादी में कसर नहीं, फिर क्यों दिल घबराता है
बिखरे-बिखरे मन को, हर टूटा आईना डराता है

बैचेन हवा, है नींद उड़ी, फिर भी मुर्दों सा पड़े रहें
तन्हाई है, गहराई तक, सपना भी नहीं आता है

सालों तक, हम रहे तरसते, वो सूरत फिर दिखी नहीं
कब मिलता वो ढूंढे से, इक बार जो दिल से जाता है

तेरी बातें अपने तक, आंसू, आहें, चाहें सब
देखते हैं खामोश जुबां का अमल, क्या असर लाता है

अजनबी सा हर दिन मिलता है, गुजर जाता खामोशी से
हर वक्त यही लम्बी सोचें, वक्त जाने क्या दिखलाता है?

सोमवार, 2 अगस्त 2010

सब जानते हैं क्या गलत क्या सही है।

कत्ल-चोरियां जिनकी जाहिर नहीं है,
चर्चों में उनकी शराफत रही है।

दया धर्म सेवा के पाखण्डों के पीछे
धन-दौलत-शोहरत की हसरत रही है।

दुनियां कहती - पैसा खुदा तो नहीं
कसम खुदा की, खुदा से कम भी नहीं है।

कानून दुनिया भर के, गरीबों के सर पे
अमीरों पर इलजामों से शोहरत बही है

इश्क रह गया कुत्ते बिल्लियों का मजहब
इंसानों में हवस की ही बरकत रही है।

हिंदू मुसलमान सिख ईसाई मिलते हैं
कहीं भी दिखती इंसानियत नहीं है।

सच की राहों पे चलना बड़ा मुश्किल,
यूं सब जानते हैं क्या गलत क्या सही है।

शनिवार, 17 जुलाई 2010

फिर से गलत अनुमान था मेरा।


तुमको अपना समझ लिया था,
फिर से गलत अनुमान था मेरा।

इन्‍कार उन्‍होंने नहीं कि‍या था

बस इतना सम्मान था मेरा।

सारे सितम हँस के सहता था
ये किस पर अहसान था मेरा?

जीते-जी कभी नहीं मिला था,
हाँ! वही तो भगवान था मेरा।

बरसों पहले भूल गया था,
क्या पहला अरमान था मेरा।

रोता और भड़क जाता था,
अभी जिन्दा इंसान था मेरा।

घुड़की-गाली सुन लेता था,
अहं नहीं परवान था मेरा।

शनिवार, 3 जुलाई 2010

हर तरफ, तेरी याद बिखरती देखी

जब कभी, कहीं, बारिश बरसती देखी
हर तरफ, तेरी याद बिखरती देखी

यूं तो मेरे दिल सा, बुझदिल कोई ना था
तुम मिले, इसी दिल से, दुनिया डरती देखी

तेरी याद के गहरे सन्नाटे में अक्सर
इक हूक सी उठती-उभरती देखी

कि हमने ख्वाहिशों को पालना ही छोड़ दिया
तेरी जुदाई में, ख्वाहिशें सभी, मरती देखी
_________________________________________________________________________
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मंगलवार, 29 जून 2010


तन्हा लहर है, तन्हा किनारे,
सारे सागर हैं तन्हा
हम ही उसकी यादों की भीड़ में
सारे नजारे हैं तन्हा

जलाती है जुदाई की आग
हम दीवाने परवानों को
शमां को कोई खबर ही नहीं
सारे शरारे हैं तन्हा

चांद ना जाने कहां गया है
चातक की सारी रात गई
सारे बादल भटक रहे हैं
सारे सितारे हैं तन्हा

तुम जो हमसे पराये हुए
पराये सारे साये हुए
मौत जिन्दगी में फर्क खत्म है
हम बेचारे हैं तन्हा

मंगलवार, 15 जून 2010

उस मिट्टी में सौन्दर्य की प्रवाहना सी है


मेरी काया में जो आत्मा सी है
उसके लौट आने की संभावना सी है


वो बदल ले मार्ग या सम्बंध बदल ले
वही रहेगी, जो प्रेम की भावना सी है

मैं पानी की तरह पटकता रहूंगा सर
उस पत्थर में विचित्र चाहना सी है

मैं क्यों उस मौन को नकार मान लूं
उस मौन में मेरी सराहना सी है

छानूंगा, गूंथूंगा, गढूंगा, कभी तो संवरेगी
उस मिट्टी में सौन्दर्य की प्रवाहना सी है

शनिवार, 15 मई 2010

जालिम तेरी अंगड़ाई का क्या है



दीवारें-पर्दे-धागे, मंच-दर्शक पराये
कठपुतलियों की खुदाई का क्या है

कर दिखाने-मर दिखाने में, गुंजाइश है
वरना केंचुओं की लड़ाई का क्या है

मुझमें ही कुछ तूफान उठें हैं
जालिम तेरी अंगड़ाई का क्या है

अपनी ही नस चढ़ जाये तो दर्द है
लाख हो पीड़ पराई का क्या है

राधा ही कृष्ण थी, कृष्ण ही राधा थे
मीरा-रूक्मिणी की बड़ाई का क्या है

स्वाद तो है कुछ बनाने वाले में
शकर-पतीला-कढ़ाई का क्या है

अजनबी-परायों से रिश्तों में खींच है
जाने-पहचानों से लड़ाई का क्या है

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दृष्‍टि‍कोण
मैने अपने मनोचिकित्सक से कहा कि पता नहीं क्‍यों सब मुझसे नफरत करते हैं तो वो बोला - मैं उन लोगों से तो नहीं मिला पर तुम वाकई बहुत बेहूदा आदमी हो।

स्त्री होने के कई फायदे हैं वो रो सकती है, सुन्दर कपड़े पहन सकती है और किसी जगह डूब रही हो तो उसे ही लोग पहले बचाते हैं।

स्त्री शब्द के दोनों अर्थ एक समान है वो गर्म होती है, दबाती है और सलवटें निकाल कर अपने हिसाब से सल डाल देती है।

अगर प्यार अंधा होता है तो अंतःवस्त्र इतने प्रसिद्ध, प्रचलन और मांग में क्यों रहते हैं।

अगर आप बहुत आरामतलब हो गये हैं तो निश्चित ही आपको जंग भी लग गया होगा।

उस व्यक्ति की जिन्दगी भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण है जिसका जीवन बहुत ही सामान्य बीता।

यदि आप आत्मविश्वास से भरे दिख रहे हैं तो कोई भी आपका फायदा उठा सकता है क्योंकि आपको खुद को ही पता नहीं होता कि आप क्या कर रहे हैं।


उन सब चीजों में से जिन्हें मैने खोया, मैं अपने दिमाग की कमी सबसे ज्यादा महसूस करता हूं।
- मार्क ट्वेन


बुरी याददाश्त, खुशियों की चाबी है, क्योंकि आप एक ही चुटकुले पर कई बार हंस सकते हैं।

कुछ लोग कहीं जाने पर खुश होते हैं और कुछ लोगों के कहीं भी जाने पर सब खुश होते हैं।

दृढ़ता और हठ में ये अन्तर है कि दृढ़ता मजबूत इरादे से आती है और हठ सिरे से किसी चीज को नकारने से।

पोषक आहार का पहला नियम है जो स्वादिष्ट है वो आपके लिए अच्छी चीज नहीं है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि महत्वपूर्ण चीज को कैसे महत्वपूर्ण रखा जाये।
- जर्मन कहावत

अतीत उस नाव की तरह है जिससे हम वर्तमान की नदी पार करें ना कि अतीत की नाव को सिर पर उठाकर नदी पार करें।
- राजेशा


आदमी के साथ खुश रहना है तो जरूरी है कि उसे आप समझें और थोड़ा बहुत प्यार दें पर अगर औरत के साथ खुश रहना है तो जरूरी है कि आप उसे ढेर सारा प्यार दें और भूल के भी उसे समझने की कोशिश ना करें।

मैंने खेलना नहीं छोड़ा क्योंकि मैं उम्रदराज हो रहा हूं, मैं उम्रदराज हो रहा हूं क्योंकि मैंने खेलना छोड़ दिया है।

अगर सब एक जैसा ही सोच रहे हैं तो मानिये कोई भी सोचने के मामले में गंभीर और अच्छी तरह नहीं सोच रहा है।

आप एक ही बार जवान होते हैं पर हो सकता है आप हमेशा अपरिपक्व रहें।

बुधवार, 12 मई 2010

दिल्लगी की मुश्किल


मुझको ये ईनाम मिला है, उस संगदिल की महफिल से
‘‘दीवाना इक’’ नाम मिला है, उस संगदिल की महफिल से

डूबा, ये गम लेकर दिल में, कोई किनारा नहीं रहा
सारा नजारा देखा उसने, चुपचाप खड़े हो साहिल से

जिस पर की कुर्बान जान, भूला वही अनजान जान
हँस हँस के बातें करता है, महफिल में वो कातिल से

गली-गली में दिल को लगाया, शहर-शहर में धोखा खाया
अब क्यों नजरें किसी से मिलायें, मिली हैं नजरें मंजिल से

किस से, किसका शिकवा करते, अजनबी वो हमारा नहीं रहा
अब दिल की धड़कन डरती है, हर दिल्लगी की मुश्किल से

मंगलवार, 11 मई 2010

रोने गाने की आवाजें भी, कानूनों में ढलवाओगे ?




गहरी-गहरी बातें करना, शगल बड़ा बेरूखा है
पिछले पहर के सन्नाटों में, खुद को तन्हा पाओगे

जख्मी यादें, मीठी छुरियां और रिश्ते अनजाने सब
ढली जवानी के सायों में, तुम भी गुम हो जाओगे

रात अंधेरी, हाथ ना सूझे, लोग नींद में चलते हैं
किससे-किससे बच के चलोगे, कदम-कदम टकराओगे


गहरी सुरंगें, अनगिन रस्ते, सब पर मुर्दे बिखरे हैं
अपनी आसों की सांसों को, कब तक जिन्दा रख पाओगे

शेर गजल नजमों के कायदे, सि‍खलाये क्‍यों कोई हमें
रोने गाने की आवाजें भी, कानूनों में ढलवाओगे ?