Saturday, 22 May 2021

Paulo Coelho के कोट्स हिन्दी में

केवल एक ही चीज है जो किसी सपने को उपलब्ध होने में, असंभव बना देती है वह है — असफलता का भय।
“There is only one thing that makes a dream impossible to achieve: the fear of failure.”
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आपको जोखिम उठाना ही होता है। हम अपने जीवन में चमत्कारों को केवल तब ही पूरी तरह समझ सकते हैं जब हम अपने जीवन में अप्रत्याशित को घटने का मौका दें।
“You have to take risks. We will only understand the miracle of life fully when we allow the unexpected to happen.”
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हर वरदान जिसे नज़रअंदाज किया जाता है, अभिशाप बन जाता है। 
Every blessing ignored becomes a curse
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साहसी बने. जोखिम उठायें. अनुभव तजु​र्बे का कोई तोड़ नहीं है, इसकी जगह कोई नहीं ले सकता।
“Be brave. Take risks. Nothing can substitute experience.”
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अपने दिल से कहिये — दर्द.कुछ बुरेहोने.दुख.संताप. का भय किसी दु:ख से ज्यादा भयावह होता है। और कोई भी दिल कभी भी दु:खी नहीं होता जब वह अपने स्वप्न की खोज के उपक्रम में होता है।
“Tell your heart that the fear of suffering is worse than the suffering itself. And no heart has ever suffered when it goes in search of its dream.”
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एक दिन आप जागेंगे तो पायें कि आपके पास जरा भी समय शेष नहीं वो सब करने का, जो आप हमेशा करना चाहते थे. तो जो करना है आज अभी करें। ..
One day you will wake up and there won’t be any more time to do the things you’ve always wanted. Do it now.
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यदि आप सफल होना चाहते हैं तो एक ही नियम है— कभी भी खुद से झूठ न बोलें।
If you want to be successful, you must respect one rule – Never lie to yourself
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जब आप रास्ता पहचान गये हैं तो आपको डरना नहीं चाहिए। गलतियां करने का आपमें पर्याप्त साहस होना चाहिए। निराशा, हार, अवसाद, परेशानी झुंझलाहट ये ईश्वर के साधन हैं --- आपको रास्ता दिखाने के। 
When you find your path, you must not be afraid. You need to have sufficient courage to make mistakes. Disappointment, defeat, and despair are the tools God uses to show us the way.
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जब कोई छोड़ जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि कोई आने पहुंचने ही वाला है।
When someone leaves, it’s because someone else is about to arrive
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हमारे जीवन में परेशानियां आने के कारण होते हैं पर हम उनका सामना करने को तैयार नहीं होते। लेकिन इन परेशानियों से उबरने के बाद ही हमें पता चलता.समझ आता है कि किस चीज की क्या वजह थी।
There are moments when troubles enter our lives and we can do nothing to avoid them. But they are there for a reason. Only when we have overcome them will we understand why they were there.
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कोई किसी को नहीं खोता, क्योंकि कोई भी किसी को नहीं पाता। मुक्ति का यही सत्य है, बिना पाये ही समझने वाली यह महत्वपूर्ण चीज है।
No one loses anyone, because no one owns anyone. That is the true experience of freedom: having the most important thing in the world without owning it.
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अपने दिमाग को कभी भी इसकी इजाजत न दें... कि  वो आपके दिल को बताये कि क्या करना है। क्योंकि दिमाग बड़ी ही ​जल्दी घुटने टेक देता है।
Don’t allow your mind to tell your heart what to do. The mind gives up easily.
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चमत्कार तब ही घटते हैं जब आप इनमें यकीन करते हैं।
वह लोग सौभाग्यशाली हैं जो पहला कदम उठा सके।
टाईमपास करने की जगह कुछ करें। क्योंकि टाईम आपको पास कर रहा है। आप बीत रहे हैं, निरंतर मर रहे हैं।
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Miracles only happen if you believe in miracles.
Fortunate are those who take the first steps.
Do something instead of killing time. Because time is killing you.
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एक ऐसी जिन्दगी जिसका कोई कारण नहीं होता, कोई प्रभाव भी नहीं होता।
A life without cause is a life without effect
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यदि आप सोचते हैं कि रोमांचक कार्यों में जोखिम है, ये खतरनाक हैं तो रूटीन रोजमर्रा की नींदमेंडूबी.जिंदगी में खो जायें.. ये धीमीमौतहै.जानलेवा है।
If you think adventure is dangerous, try routine: it is lethal.
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आपको हमेशा ही यह पता होना चाहिए 'कि आखिर आप चाहते क्या हैं?'
You must always know what it is that you want
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आपके पास दो ही चुनाव हैं — पहला —आपका मन पर नियंत्रण, दूजा — आप खुद मन के नियंत्रण में रहें। 
You have two choices, to control your mind or to let your mind control you
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हमसे नफरत करने वाले, हमारे कन्फ्यूज प्रशसंक होते हैं वेा समझ नहीं पाते कि क्यों ​हमें सब पसंद करते हैं। 
Haters are confused admirers who can’t understand why everybody else likes you
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असंभव की ताक खोज फिराक में रहें। मैं हमेशा अपनी सीमाओं की तलाश में रहता हूं। अगर मैं नहीं पाता, तो इससे मेरा विश्व निरंतर फैलता बढ़ता रहता है।
Go for the impossible. I always tried to find my own limits. So far I did not find them, so my universe is in constant expansion.
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किसी दिन, शायद, यदि... ये बड़े खतरनाक शब्द हैं इनसे बचकर रहें।
'Someday'

, ‘maybe’ and ‘if’ are very dangerous words that must be avoided.




Sunday, 31 January 2021

गरीबी

गरीबी - एक फैशन. गरीब कब तक दिखेंगे ? गरीबी भौतिक होती है या मानसिक? गरीबी स्वैच्छिक है या विवशता? किताब और रोटी में किताब यदि पहले मिल जाये तो जिंदगी का पहला कायदा सीख लिया जाये। बिना पढ़े निरक्षरता ही नहीं, जीवन में दरिद्रलक्ष्मी भी विस्तार पा जाती है।
गरीबी बहुत बड़े अपराध नहीं करती, बस अपराधों की शुरूआत करती है। अमीरी की कोख से पहला अपराध ही हजार करोड़ डाॅलर से कम का नहीं होता। वह वित्तीय, आर्थिक, भौतिक, सामाजिक, स्वास्थ्य, मानवता किसी भी श्रेणी की वजह में नहीं समाता।
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जाग सके तो जाग, गरीब की टेम्पररी झोंपड़ी में, लाल पीली आग...

Thursday, 19 November 2020

Dear friends ! #Need money. #Needs #JOB/ #Naukri.

Dear friends ! #Need money. #Needs #JOB/ #Naukri. . #MA #BEd | Knowledge/Execution on #Adobe Photoshop, #InDesign, #Illustrator, #CorelDraw, EMsOffice etc. #Print #Media #Graphics and Designing | Do #English/Hindi /Punjabi #Translation | Experience little xyz type #VideoEditing on #AdobePremier | #Want to #work with any #religious #spiritual organisation | #Anywhere in #India. . Please Tell/ Message, if you have any lead....






Thursday, 12 November 2020

रट्टू तोता

 


तकरीबन महीना भर पहले की बात है। ये तोता.. जिसकी तस्वीर यहां दी गई है, हमारे परिसर में आया। इसने दो चार गिनती के शब्द रटे हुए थे, यानि स्वाभाविक ही हम सब को महसूस हुआ कि शायद किसी के घर का पला—बढ़ा, मनुष्यों के बीच रहने वाला अभ्यस्त तोता है। जिस किसी की भी बालकनी में जाता वही, फल—फ्रूट—सब्जी, भोज्य इस तोते को प्यार से परोसता। किसी ने जबरिया पकड़ने और पिंजरे का इंतजाम कर अपने यहां ही रख लेने की कोशिश नहीं की। 

दिन गुजरे और आज धनतेरस का दिन आ गया। दीपावली के अवसर पर बिल्डर के आदमियों ने परिसर के सभी ब्लॉक्स में कल ही बिजली के बल्बों की लड़ियां लटकाईं थीं। आज सुबह सभी को इस तोते की यह बात पता चली कि सभी बा​ल​कनियों में जहां भी यह तोता जा रहा है, ब​ल्बों की लड़ियों की तारें कुतर रहा है। महीने भर, सबके मनोरंजन का केन्द्र रहा यह तोता.. आज सबके गुस्से और परेशानी का सबब बन गया है। 
इस तोते की मजबूरी या विव​शता उसकी पिंजरे, मनुष्यों के बीच रहने की आदत है। मैं सोच रहा था यह वापिस — पास ही के जंगल में क्यों नहीं उड़ जाता, अपनी ही प्रजाति जाति के तोतों के झुंड में रहने क्यों नहीं चला जाता?, अपनी कुदरती आजादी में क्यों नहीं रहता? 
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मुझे जाने क्यों तोते से संबंधित एक कहानी याद आ गई। 
एक गांव के बाहर एक अमीर आदमी रहता था। धर्म अध्ययन—अध्यापन, योग अध्यात्म से उसे बड़ा प्रेम था। गांव के बाहर अपना निवास बना रखा था ताकि लोग उसके इस काम में बाधा ना बनें। एक सुबह घर के सामने, एक ऊंचे पेड़ से के कोटर से गिरा हुआ एक तोते का बच्चा उसे मिला। उसने उसे पाल लिया। एक बड़े सुंदर से पिंजरे में उसे रखा और जो भी अध्ययन मंत्र गीत उसे प्रिय थे उन्हें सिखाने लगा। कुछ ही दिनों में तोता उसकी सिखाये कई शब्द बोलने लगा। एक दिन उस व्यक्ति को किताबें खरीदने शहर जाना था तब उसे लगा कि अब कौन इसकी देख रेख करेगा? खैर.. इस बात का इंतजाम कर वो शहर गया। शहर में, अपने कामकाज की जगह जाते हुए उसने देखा कि एक पंछी बेचने वाला कई छोटे छोटे पिंजरों में 5—10 तोतों को बेच रहा था। उसे अपना तोता याद आया।
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जब वो घर लौटा तो उसने सोचा कि हो सकता है यह तोता कभी इस पिंजरे से उड़ जाये। किसी जंगल चला जाये। पर फिर किसी शिकारी के हाथ गया तो? तो क्यों न तोते को मैं कोई/कुछ ऐसी बात सिखा दूं... ​रटा दूं कि इसे किसी जालिम शिकारी के पिंजरे में न कैद होना पड़े। यहां वहां न बिकना पड़े। इसे बचने का मौका मिल जाये, ये उड़ जाये, और लौट कर फिर कभी न आये... और सदा मुक्त रहे। 
तो उसने तोते को सिखाया— रटाया:
मिट्ठू... मिट्ठू से मिलने जायेगा
लौट को फिर यहीं आयेगा
भरोसा तो करो....

 

तोता बूढ़ा नहीं था, जल्द ही उसने यह तीन वाक्य भी रट लिये। जब यह तीन वाक्य, तोते ने भली भांति रट लिये तो व्यक्ति ने सोचा — कि मैंने जो इसे सिखाया है इसमें गलत क्या है... वैसे भी पंछी को तो मुक्त ही रहना चाहिए। यदि इसे पिंजरे में रहना होगा तो खुद ही आयेगा। उसने तोते को पिंजरे से बाहर निकाला, खुला छोड़ दिया.. मगर तोता वापिस पिंजरे में जा बैठता। तो आदमी ने कहा — चलो मुक्त रहो, और मेरे पास भी रहो। अब वह तोते से निश्चिंत था। तोता भोजन पानी के लिए नीचे आता और बाकी समय घर के सामने या अन्य पेड़ों पर उड़ान भरता, मनमौजी रटी बातें बोलता और मस्त रहता। 
फिर एक बार यूं हुआ कि तोता उसके घर कई दिनों तक नहीं आया। उस व्यक्ति ने सोचा कि चलो, पंछी है, मौज में कहीं चला गया होगा। उसने इंतजार किया पर तोता गया तो लौटा ही नहीं।
कुछ महीने बाद व्यक्ति को, फिर किताबें खरीदने शहर जाना पड़ा। लौटते हुए उसे वही तोते पंछी आदि बेचने वाला मिला, बड़ी उम्मीद से वह उसके पास पहुंचा और बोला कि क्या किसी जंगल में राम राम, गायत्री मंत्र और मिट्ठू इत्यादि बोलने वाला तोता तो नहीं दिखा। पंछी बेचने वाला बोला — भाई साहब हम तो शहर में रहते हैं... जंगली शिकारियों से पंछी खरीदते हैं शहर में बेच देते हैंं। हम खुद थोड़े ही जंगल जाकर...वगैरह वगैरह।

कई महीने बीत गये और साल भी। उस व्यक्ति का घर पुराना हो गया। छत चूने लगी। उसने मजदूर बुलाये और उन्हें घर के रिनोवेशन के काम पर लगाया। इस काम धाम से अलग एक कमरे में वो शांत हो किताबों में मग्न था। एक दोपहर उस व्यक्ति का ध्यान... दो मजदूरों की बातों पर गया—
पहला मजदूर बोला — मैं कल ही शहर गया था, हमारा मिट्ठू तो बहुत महंगा बिका, एक शहरी व्यक्ति ने उसके दो हजार रूपये दिये। 
दूजा बोला — चलो किसी काम तो आया, वरना गांव में तो उसने लोगों को परेशान कर रखा था। कहीं भी बैठ जाये मंत्र गाये, राम राम बोले और वो क्या बोलता था... 
मिट्ठू... मिट्ठू से मिलने जायेगा
लौट को फिर यहीं आयेगा
भरोसा तो करो....

.... अरे मिट्ठू टें टें कर तोतों को बुलायेगा, फसलें सब्जियां खराब करेगा, यहां वहां चीजें कुतरेगा ये तो बोलता ही नहीं था।
पहला मजदूर बोला — अरे शहरियों को क्या मतलब, उसकी आजादी से... वो तो पिंजरे में रखेंगे, उनके वास्तुदोष शांत हो जायेंगे और उनके बच्चों का मनोरंजन भी। वैसे भी, उसे तो पिंजरे में ही रहने की आदत है... पता नहीं किसने सिखा दिया था कि —
मिट्ठू... मिट्ठू से मिलने जायेगा
लौट को फिर यहीं आयेगा
भरोसा तो करो....
भरोसा क्या करना, वो तो पिंजरे में ही रहने का आदी हो गया था, समय पर खाना—पीना, बच्चों—औरतों के बीच , मनुष्यों घरों में ही रहना—बैठना, रटी रटाई बातें बोलना। 

...

किताबों में मग्न व्यक्ति को अचानक जैसे ब्रह्मज्ञान हुआ। बरसों से वह भी किताबों में मग्न है। धर्मग्रन्थों का अध्ययन अध्यापन, दूजों को बताना कि क्या करना और कैसे करना है... लेकिन वो स्वयं तो उस तोते की तरह है, जिसने उसे स्वयं ही सिखाया था कि —
मिट्ठू... मिट्ठू से मिलने जायेगा
लौट को फिर यहीं आयेगा
भरोसा तो करो....
उसने स्वयं कभी ​किताबों, भाषणबाजी और रटी—रटाई बातों से इतर मुक्ति का स्वाद नहीं चखा। ना उन बातों का उसके जीवन में, जिसे वह जी रहा है... उससे कोई सरोकार रहा।

Sunday, 24 June 2018

क्या आप जानते हैं— 'सुनना' एक महान कला है।

न महान कलाओं में से है जो हमने नहीं रचीं— एक है "किसी को पूरी तरह सुनना। ध्यानपूर्वक सुनना। कान या श्रवणमात्र.. सुनना ही हो जाना।"
जब आप​ किसी को पूरी तरह ध्यान लगाकर सुनते हैं, तब आप...अपने आपको या अपने बारे में भी सुनते हैं। अपनी ही समस्याओं, अपनी ही अनिश्चितताओं, अपनी ही दुगर्ति दुर्भाग्य का किस्सा सुनते हैं। भ्रम, सुरक्षा की चाह और शनै:शनै: मन के पतन होने की कहानी सुनते हैं.. कि कैसे आपका मन ज्यादा से ज्यादातर यंत्रवत होते गया, कैसे आप रोबोट जैसे ही हो गये।
~ जे कृष्णमूर्ति 'सम्बंधों में जीवन' मैग्नीट्यूड आॅफ माइंड
You know listening is a great art. It is one of the great arts we have not cultivated- to listen completely to another. When you listen completely to another, you are also listening to yourself- listening to your own problems, to your own uncertainties to your own misery, confusion, the desire for security, the gradual degradation of the mind which is becoming more and more mechanical.

Wednesday, 4 April 2018

एक खूब सूरत पंजाबी रूहानी सा लोकगीत - मिट्टी दा बावा

Mitti Da Bawa मिट्टी दा बावा 

.....
कित्ते ते लावां टालियां
वे पत्ता वालियां
वे मेरा पतला माही
कित्ते ते लावां शहतूत
वे तेनु समझ ना आवे

मिट्टी दा बावा मैं बनो णिं आं
चग्गा पौ णिं आं
वे उत्ते देनी आं खेसी
ना रो मिट्टी दे बा वेया
वे तेरा प्यो परदेसी

मिट्टी दा बावा नई बोल दा
वे नइ यो चालदा
वे नइ यो दें दा हुं गारा
ना रो मिट्टी दे या बा वे या
वे तेरा प्यो बणजारा

मेरी जे हिं या लक्ख गोरियां
वे तन्नी डोरियॉं
वे गोदी बाल हिंडोले
हॅंस हॅंस दें दियां लो रि यां
वे मेरे लड़न सपोले
...
दीवा बले सारी रात पंजाबी फिल्म 2011

Monday, 31 October 2016

एक दिया

जब से एंड्राइड स्मार्टफोन लिया है, लिखने की आदत छूट सी गई. केवल फेसबुक. फेसबुक क्षणिक सुख है माया है. सारे महत्वपूर्ण सुख क्षणिक होते हैं. क्या आपने लंबे चलने वाले सुख देखे हैं? सुख भी यदि लंबे चलें तो बोरियत और दु:ख में तब्दील हो जाते हैं.
दुख या तो भूतकाल होता है या भविष्यकाल. जो वर्तमान है वो ना तो दुख होता है ना सुख. लेकिन जब हम जो अभी सामने है, उसका सामना नहीं कर पाते तो बात सुखद या दुखद में रंग जाती है. जब हम जो अभी सामने ही है उसे टालकर अतीत में धक्का मारकर गिरा देते हैं या ख्यालों ख्वाबों की पतंग के कंधे पर बैठा उसे भविष्य में प्रक्षेपित करते हैं तो बात विकृत हो जाती है...कुरूप भ्रष्ट हो जाती है.
सोशलसाईट्स पर कहीं भी जाओ  आस्तिक नास्तिक मिलेंगे, हिंदू मुसलमान मिलेंगे, राष्ट्रवादी और देशद्रोही मिलेंगे, पक्ष या विपक्ष वाले मिलेंगे... अतियों पर खड़े लोग मिलेंगे या अतियों की ओर सरकते हुए.. बीच में खड़े होकर कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाटी हाथ... इस मुद्रा में कोई नहीं दिखता... दिखता भी है बस लिखता लिखता ही दिखता... नाना पाटेकर बोला मिट्टी की, बाती की, तेल की, और आखिरकार लौ की, आग की कौन जाति होती है?
ज्ञानीजनों की संगत मुश्किल है क्योंकि ज्ञान के साथ अहं फ्री मिलता है. निपट ज्ञानी नहीं मिलेगा उसके साथ कुछ ना कुछ श्लेष्मा अलंकृत होता है जो उसे ज्ञानी नहीं रहने देता-
गुजरात में नया साल दिवाली से शुरू होता है... तो देखते हैं रोज नये दिये सी एक नई ब्लॉग पोस्ट

Sunday, 24 January 2016

फेसबुक पर चिपको आंदोलन


इतना तो तय है कि अगर आदमी को काम हो, उसे फालतू चीजों के लिए फुर्सत ही ना हो तो आदमी फेसबुक लाॅगइन नहीं करेगा. एक आदमी जो रोटी-कपड़ा-मकान-दुकान के चक्कर में है वह भी फेसबुक पर नहीं होता. नियमित रूप से खाने-पीने के प्रति लापरवाह, खाते-पीते ऐसे लोग जिनके पास बिजली, कम्प्यूटर और इंटरनेट पर किये गये खर्च का हिसाब रखने के कारण नही हैं.. वो सोशन नेटवर्किंग साईट्स (सो.ने.सा.) पर सहज होते हैं।

कम्प्यूटर इंटरनेट की सुविधा होने के बावजूद फालतू लोग हैं, कोई काम नहीं... तो बस बैठे हैं. दूसरों पर कमेंट करना. सुनी-सुनाई, पढ़ी-पढ़ाई बातों से ही बात का बतंगढ़ बनाना. गलतफहमी होना कि आस-पास पास-पड़ोस में यार-दोस्त नहीं मिल सके तो यहां मिल जायेंगे. किसी ना किसी तरह के नेटवर्क में रहने की भी एक आदिम तलब भी...एक वजह है. भड़ास निकालना. अफवाह फैलाना. चुगलियां करना. व्यर्थ की बतौलेबाजी. टांग खींचना और अजनबी लोगों की टांग खींचना. उपदेश देना. 3 लोग महज इसलिए जबरन फेसबुक पर होते हैं कि उनके अन्य 7 साथी यहां पर हैं. जो बातें कर नहीं पा रहे हैं, करने में सक्षम नहीं है..वो कही जाती हैं तो ऐसी बातों का भी यह एक मंच है. गालियों का भी.

कम्प्यूटरनेट से पहले कुछ लोग हुआ करते थे जिनमें लिखास का जीन्स सक्रिय होता है... उनके लिखे को उन्हीं के समाज-जाति वालों द्वारा छपवाई स्मारिकाओं में भी जगह नहीं मिल पाती थी.. तो उनके लिए भी यह एक उपयुक्त मंच है. लोग फेसबुक पर छपास भी निकालते हैं. किसी मासिक पत्रिका या समाचार पत्र में कोई लेख या कविता भेजनी है तो उसे पहले फेसबुक पर डाल दो... प्राथमिक मूल्यांकन हो जाता है. जिन्हें अच्छा लिखने की गलतफहमी है वह अपने बारे में गाने गा सकता है, जो बुरा लिखते हैं वो दूसरों के अच्छे के आलोचक हो सकते हैं... कि फलां फलां चीज की कहां कहां कमी है। किस किस गुड़ में कहां कहां कुछ गोबर का टच देते तो क्या ही फ्रूंटपंच बनता. पहले अच्छे-खासे लेखकों को स्थापित होने में एक उम्र लग जाती थी, अक्सर तो उसकी पहली दूसरी बरसी पर ही पता चलता था कि वह कितना महान था... आज के लेखक पैदा बाद में होते हैं... सारी सोनोग्राफिक कहानी पहले छप चुकी होती है. लाखों की तादाद में महिला अनुयायी... फोलोवर्स होते हैं। सो.ने.सा. ने विभिन्न तरह की गुटबाजी को काफी सहयोग दिया है...


फिर दुनियां भर की खबरे सुनने को मिलती हैं, उन पर आदमी चिंतित होता है.. अब कुछ करेगा तो मेहनत, ताकत, हिम्मत, दिमाग, पैसा जाने क्या क्या खर्च होगा... फेसबुक पर बैठे-ठाले बतौलेबाजी करो, चिंताओं के चिंतन से सारे नेटवर्क को धन्य करो। खुद चिता पर बैठे हो दूसरों को भी जलाओ, खुद का पक रहा है, दूजों का दिमाग भी दही करो।

फेसबुक टाईमलाईन लोगों के बारे में मोटा मोटा हिसाब तो दे ही देती है। ज़रा भी सच्चाई हो तो किसी की अपलोड या शेयर की तस्वीरें और पठन सामग्री बता देती है कि कौन, किस उम्र में, कैसा और फिलवक्त इनका क्या मिज़ाज है, बावजूद इसके कि यह मुखौटालोक है..धोखा हो सकता है।

आदमी ताउम्र मनोरंजन चाहता है. जैसे देह.दिमाग.मन हैं वैसै वैसे मनोरंजन के जरिये भी... यहां तक की ज्ञान.ध्यान को भी मनोरंजन बना लिया जाता है-