था मैं इतना पराया भी नहीं
कि तूने आजमाया ही नहीं
जो दौलतें हैं तो संग सब ही
नहीं तो धूप में साया नहीं
18-18
उम्र और तजुर्बे बोलते हैं
उम्र और तजुर्बे बोलते हैं
यूं मैं कुछ सीखा सिखाया नहीं
मौत से क्यूं मैं रोज डरता रहाएक बार इश्क से होकर गुजरा
हकीकत तो मैं रोज मरता रहा
सहना सब्र और समझ का रस्ताजब भी किसी का दर्द टटोला तो
बस मुसीबतों से यूं तरता रहा
जब भी जीवन में कुछ शिवम पायाछंद में मात्राओं का संतुलन
याद में मां की, शीश धरता रहा
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| टीपू किबरिया द्वारा खींची गई तस्वीर |