Monday, 31 August 2009

सब प्रश्नों का एक ही उत्तर

पैसा खुदा क्यों?
भाई-भाई से जुदा क्यों?
बाप-बेटे में क्यों रंजिश है?
सब कुछ है फिर भी खलिश है?
बीमारियों का जाल क्यों फैला?
इंसान हुआ क्यों एड्स से मैला?
राहत राशि क्यों कम पड़ जाती है?
जीने की राह नजर नही आती है?
99वें का फेर क्या है?
देर में अंधेर क्या है?
राम को वनवास क्यों मिला?
रावण को राम से क्यों गिला?
भोजन काफी ज्यादा है, पर क्यों मिलता सबको आधा है?
दवा और दारू में क्या फर्क है?
क्या स्वर्ग है क्या नरक है?
कर्ज की जरूरत क्यों पड़ती है?
मर्ज की तेजी क्यों बढ़ती है?
होम करते हाथ क्यों जलते हैं?
चादर के बाहर खवाब क्यों पलते हैं?
उम्मीद का रहना क्या है?
संतों का गहना क्या है?
सुबह नींद जल्द क्यों नहीं खुलती?
अतीत की यादें क्यों नहीं घुलतीं?
रामराज का अर्थ क्या है?
किसी भी काज में अनर्थ क्या है??
आदमी कार्टून कब बन जाता है?
जुनून पागलपन कब कहाता है?
मन की शांति क्या है?
जग में भ्रांति क्या है?
विवेक क्या है, अविवेक क्या है?
बुरा क्या है, नेक क्या है?
सच की सजा क्यों हैं?
झूठ में मजा क्यों है?
लोभ पाप क्यों है?
सारे संताप क्यों हैं?
अनुशासन का क्या मतलब है?
तौल का क्या सबब है?
नजर कितनी होनी चाहिए?
बोवनी कितनी बोनी चाहिए?
विश्वास, अंधविश्वास क्या है?
प्रेम और मोहपाश क्या है?
कूकर में सेफ्टीवाल्व क्या है?
मनुष्य जीवन में काल क्या है?
आटे में नमक कितना डालें?
घाटे को कब संभालें?

इन सब प्रश्नों का एक ही उत्तर है-
जरूरत और हवस में अंतर है,
‘अति’ से बचना सबसे बड़ा मंतर है।