Sunday, 24 June 2018

क्या आप जानते हैं— 'सुनना' एक महान कला है।

न महान कलाओं में से है जो हमने नहीं रचीं— एक है "किसी को पूरी तरह सुनना। ध्यानपूर्वक सुनना। कान या श्रवणमात्र.. सुनना ही हो जाना।"
जब आप​ किसी को पूरी तरह ध्यान लगाकर सुनते हैं, तब आप...अपने आपको या अपने बारे में भी सुनते हैं। अपनी ही समस्याओं, अपनी ही अनिश्चितताओं, अपनी ही दुगर्ति दुर्भाग्य का किस्सा सुनते हैं। भ्रम, सुरक्षा की चाह और शनै:शनै: मन के पतन होने की कहानी सुनते हैं.. कि कैसे आपका मन ज्यादा से ज्यादातर यंत्रवत होते गया, कैसे आप रोबोट जैसे ही हो गये।
~ जे कृष्णमूर्ति 'सम्बंधों में जीवन' मैग्नीट्यूड आॅफ माइंड
You know listening is a great art. It is one of the great arts we have not cultivated- to listen completely to another. When you listen completely to another, you are also listening to yourself- listening to your own problems, to your own uncertainties to your own misery, confusion, the desire for security, the gradual degradation of the mind which is becoming more and more mechanical.