Monday, 23 May 2011

तुम्‍हारे बि‍ना



हर्मन हैसे






रात को
मेरा तकिया
मुझे टकटकी बांधे देखता है।
मैं खाली और अकेला हो जाता हूं,
समाधि के पत्थर की तरह।
मैंने नहीं सोचा था
तुम्हारी जुल्फों छांव में नहीं सोना
इतना कड़वाहट
भरा हो जायेगा।
मैं लेटता हूं
एक सुनसान घर में
जहां लटकता हुआ लैम्प
अंधेरा बढ़ाता है।
और फिर धीरे धीरे
मेरे हाथ
तुम्हारे हाथों को थाम लेते हैं
मेरा गर्मजोशी से भरा चेहरा
तुम्हारे चेहरे की ओर बढ़ता है
.... कोई चुम्बन
बुरी तरह झिंझोड़ देता है मुझे
और अचानक
मैं जाग जाता हूं
मेरे ईर्द गिर्द
अपने चरम की यात्रा करती
वही ठंडी ठिठुरती रात होती है
खिड़की पर ठहरा सितारा
टिमटिमा रहा है
तुम्हारी सुनहरी जुल्फें कहां गईं ?
तुम्हारा चॉंद सा चेहरा कहां गया ?
अब मैं
हर खुशी के साथ
दर्द पीता हूं
हर जाम के साथ जहर
मैं नहीं जानता था
यह इतना कड़वा होगा
अकेला होना,
अकेलापन
तुम्हारे बिना।


मूल कवि‍ता

Without You
by
Hermann Hesse

My Pillow gazes upon me at night
Empty as a gravestone;
I never thought it would be so bitter
To be alone,
Not to lie down asleep in your hair.
I lie alone in a silent house,
The hanging lamp darkened,
And gently stretch out my hands
To gather in yours,
And softly press my warm mouth
Toward you, and kiss myself, exhausted and weak-
Then suddenly I'm awake
And all around me the cold night grows still.
The star in the window shines clearly-
Where is your blond hair,
Where your sweet mouth?
Now I drink pain in every delight
And poison in every wine;
I never knew it would be so bitter
To be alone,
Alone, without you.