Thursday, 19 August 2010

हाँ मुझे मोहब्बत है उनसे... पर...

ए मेरी उदासी, ए मेरी बदहवासी
ऐ मेरे दिल की कसक, ऐ मेरी रूह प्यासी
ना उभरो चेहरे पे बेताबियों के नक्शो
हाँ मुझे मोहब्बत है उनसे... पर मुझको बख्शो

ए मेरी आंखों में उतरे पानी,
ए बेजा बरसों गुजरी नादां जवानी
ए मेरे नजरों में बसे, बंजर नजारों
हाँ मुझे मोहब्बत है उनसे... पर मुझको बख्शो

ऐ बदनामियों की हवा, ऐ जुल्मों की घटा
ऐ लानतों की नमी, ऐ जमाने की सजा
ऐ मेरे सीने की घुटन, ख्यालों की टूटन
हाँ मुझे मोहब्बत है उनसे... पर मुझको बख्शो

ऐ मेरी तन्हाई, तेरा फर्द चेहरा
ऐ मेरे शैदाईपन तेरा ताब गहरा
ऐ मेरे ख्वाबों की कालिख, नींदों की दहशत
हाँ मुझे मोहब्बत है उनसे... पर मुझको बख्शो



ha mujhe mohabbat hai unse... par mujhko bak-sho
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ae meri udaasi, ae meri bad-hawasi
ae mere dil ki kasak ae meri rooh pyaasi
naa ubhro chehre pe be-taabi-yo ke nak-sho
ha mujhe mohabbat hai unse... par mujhko bak-sho

ae meri aankhon me utre paani
ae beja barson gujri naadan jawaani
ae meri najro me basae banjar najaaro
ha mujhe mohabbat hai unse... par mujhko bak-sho

ae badnami-yo ki hawa, ae julmo ki ghata
ae laanto'n ki nami ae jamaane ki saza
ae mere sinay ki ghutan, khayalo'n ki tootan
ha~ mujhe mohabbat hai unse... par mujhko bak-sho

ae meri tanhai, tera fard chehra
ae mere shedai~pan, tera taab gahra
ae mere khwabo ki kalikh, neendo ki dahshat
ha~ mujhe mohabbat hai unse... par mujhko bak-sho