Saturday, 17 July 2010

फिर से गलत अनुमान था मेरा।


तुमको अपना समझ लिया था,
फिर से गलत अनुमान था मेरा।

इन्‍कार उन्‍होंने नहीं कि‍या था

बस इतना सम्मान था मेरा।

सारे सितम हँस के सहता था
ये किस पर अहसान था मेरा?

जीते-जी कभी नहीं मिला था,
हाँ! वही तो भगवान था मेरा।

बरसों पहले भूल गया था,
क्या पहला अरमान था मेरा।

रोता और भड़क जाता था,
अभी जिन्दा इंसान था मेरा।

घुड़की-गाली सुन लेता था,
अहं नहीं परवान था मेरा।