Wednesday, 24 February 2010

बेखुदी में भी, मुझे तेरा खयाल रहता है


बेखुदी में भी, मुझे तेरा खयाल रहता है
हो ना हो तू, यहां तेरा कमाल रहता है

क्या हुआ आज जमाना बुरा है मुझसे तो
कि गुजरा कल ही इसकी मिसाल रहता है

क्या पता, फिर मिले, जाने कहां, किस सूरत में
तेरी हर याद को, मेरा दिल सम्हाल रहता है

रोज ही रात महकती, चहकती, दमकती है
हो न हो, तू मेरी नजर, तेरा जमाल रहता है

तू माफ कर दे मुझे, पर यही मुसीबत है
रोज ही मुझमें, कोई नया बवाल रहता है

शाम होते ही जैसे दिल भी डूबा जाता है
रोज सूरज की शक्ल, नया सवाल रहता है