Saturday, 16 January 2010

फिर तेरे इशारे___



जीना मुश्किल, और चुप्पा दिल
वक्त का वार है, कैसे सहें?

रोते गीत हैं, जहरीले मीत हैं
छंदों में इन्हें, कैसे कहें?

जिन्दा तो लानत, मरे तो अमानत
इस प्रेम के नद में कैसे बहें?

दोपहर चढ़ी और रात भी बढ़ी
चि‍न्‍ताओं के पर्वत कैसे ढहें?

नैनों के काम, रहे सदा बदनाम
फिर तेरे इशारे, कैसे गहें?