Wednesday, 2 December 2009

कहाँ नहीं मिलती मोहब्बत ?




मिलेगा जो चाहेगा खुदा, सब्र रख
दुआएं अमल में ला, सब्र रख


किसे मिला है ज्यादा उसके रसूख से?
खुदा पे यकीन ला, सब्र रख


सिकन्दर भी गए हैं, पैगम्बर भी गए हैं
वक्त की शै से धोखा न खा, सब्र रख


छोटी-छोटी बातों के क्या शिकवे गिले
खुदा बन, जो चाहता है खुदा, सब्र रख


नाकामियों उदासियों के सागर कितने गहरे?
तरकीब-ए-सुराख आजमा, सब्र रख


कहाँ नहीं मिलती मोहब्बत “अजनबी”
कुर्बानियाँ बढ़ा, दीवानगी बढ़ा, सब्र रख