Wednesday, 2 September 2009

तब की बात

तुमको अपना समझ लिया था,
फिर से गलत अनुमान था मेरा।

मेरा सलाम कुबूल हुआ था,
बस इतना सम्मान था मेरा।

सारे सितम हँस के सहता था
ये किस पर अहसान था मेरा?

जीते-जी कभी नहीं मिला था,
हाँ! वही तो भगवान था मेरा।

बरसों पहले भूल गया था,
क्या पहला अरमान था मेरा।

रोता और भड़क जाता था,
अभी जिन्दा इंसान था मेरा।

घुड़की-गाली सुन लेता था,
अहं नहीं परवान था मेरा।

*इस ब्लाग पर सम्पूर्ण पाठ्य(शब्द) सामग्री राजेशा रचित, मौलिक है।
**संपादित सामग्री को उचित सन्दर्भ, लिंक एवं मूल विवरण के साथ प्रस्तुत करने का हरसंभव प्रयास किया जाता है।